भाषा ही जीवन

वृषाली सानप काळे
Thursday, 11 July 2019

ध्वनि से स्वर, स्वर से शब्द
शब्द से पद पद से  वाक्य..
वाक्य बनवाये वाक्यबंध...
वाक्यो से बनते अनुबंध..!!

तभी तो बन जाती है भाषा
अकेली नही होती है भाषा
पूरा परिवार चलाती है भाषा
पक्की खानदानी है भाषा..!!

मूल चौदह भाषा का स्थान
रहा है हमारा हिन्दुस्थान
भाषाओ की जननी महान
संस्कृत श्रेष्ठ का करो सम्मान..!!

संस्कृत तत्सम तद्भव का
मूल  ही है नव निर्माण का
बेकार है झगड़ा भाषा का..
वो माध्यम अभिव्यक्ति का..!!

ध्वनि से स्वर, स्वर से शब्द
शब्द से पद पद से  वाक्य..
वाक्य बनवाये वाक्यबंध...
वाक्यो से बनते अनुबंध..!!

तभी तो बन जाती है भाषा
अकेली नही होती है भाषा
पूरा परिवार चलाती है भाषा
पक्की खानदानी है भाषा..!!

मूल चौदह भाषा का स्थान
रहा है हमारा हिन्दुस्थान
भाषाओ की जननी महान
संस्कृत श्रेष्ठ का करो सम्मान..!!

संस्कृत तत्सम तद्भव का
मूल  ही है नव निर्माण का
बेकार है झगड़ा भाषा का..
वो माध्यम अभिव्यक्ति का..!!

पाँव तलो की धूल न भाषा
भटका सा  इतिहास न भाषा
ग्लोबलता की देवता न भाषा
दर्शन की पहचान है भाषा..!!

 

Tags

Become YINBuzz contributor. Write your stories, publish your photos and videos using Sakal Samvad App (*YINBuzz.com हा तरूणाईसाठीचा खुला डिजिटल फोरम आहे. इथे प्रसिद्ध झालेल्या मतांशी वेबसाईटचे व्यवस्थापन सहमत असेलच; असे नाही.)

Download Samvad App playstore

Related News